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8th Pay Commission Salary Record8th Pay Commission Salary Record

8th Pay Commission Salary Record: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ने पिछले तीन दशकों में लंबा सफर तय किया है। चौथे वेतन आयोग के दौरान न्यूनतम वेतन ₹750 था, जो पांचवें वेतन आयोग में ₹2,550, छठे में ₹7,000 और सातवें वेतन आयोग में बढ़कर ₹18,000 हो गया। यानी 1986 से 2016 के बीच न्यूनतम बेसिक पे 24 गुना से ज्यादा बढ़ी। सरकारी दस्तावेजों में भी छठे और सातवें वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन क्रमशः ₹7,000 और ₹18,000 दर्ज हैं। अब नजर आठवें वेतन आयोग पर है। केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन कर दिया था और आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल नई बेसिक सैलरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं हुआ है।

चौथे वेतन आयोग में ₹750 से शुरू हुआ सफर

वेतन आयोगों के इतिहास में चौथा वेतन आयोग एक अहम पड़ाव था। इसके तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹750 रखी गई थी। 15वें वित्त आयोग की एक रिपोर्ट में भी चौथे वेतन आयोग के लिए न्यूनतम वेतन ₹750 और अधिकतम वेतन ₹8,000 दर्ज है। उस समय की वेतन व्यवस्था आज की Pay Matrix से काफी अलग थी। कर्मचारियों की सैलरी अलग-अलग वेतनमानों में तय होती थी और समय के साथ निर्धारित इंक्रीमेंट के जरिए बढ़ती थी। बाद के वेतन आयोगों में वेतन निर्धारण की व्यवस्था लगातार बदली गई, जिससे कर्मचारियों की बेसिक पे में बड़ी छलांग देखने को मिली।

पांचवें और छठे वेतन आयोग में बड़ा बदलाव

पांचवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद न्यूनतम बेसिक पे ₹2,550 हो गई। इसके बाद छठे वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों की वेतन संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किया और न्यूनतम वेतन ₹7,000 तक पहुंच गया। वित्त आयोग की रिपोर्ट में भी पांचवें आयोग का न्यूनतम वेतन ₹2,550 और छठे आयोग का ₹7,000 दर्ज है। छठे वेतन आयोग के दौरान वेतन पुनरीक्षण के लिए 1.86 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया गया। इससे कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में पहले की तुलना में अलग गणना व्यवस्था सामने आई। हालांकि फिटमेंट फैक्टर को सीधे हाथ में आने वाली सैलरी की वृद्धि मानना सही नहीं है, क्योंकि वेतन में महंगाई भत्ता और अन्य घटकों का भी प्रभाव होता है।

वेतन आयोगन्यूनतम बेसिक पेप्रमुख बदलाव
चौथा₹750पुराना वेतनमान
पांचवां₹2,550संशोधित वेतनमान
छठा₹7,000फिटमेंट आधारित संशोधन

सातवें वेतन आयोग में ₹18,000 पहुंची बेसिक सैलरी

2016 में लागू सातवें वेतन आयोग ने न्यूनतम बेसिक पे को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया। इसके साथ पुरानी Pay Band और Grade Pay व्यवस्था को हटाकर Pay Matrix लागू की गई। सरकार ने सातवें वेतन आयोग की 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश को स्वीकार किया था। सातवें वेतन आयोग के बाद किसी नए कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी उसके संबंधित Pay Level की पहली Cell से तय होती है। Level-1 में न्यूनतम बेसिक ₹18,000 है। इसके अलावा हर साल 3 प्रतिशत का वार्षिक इंक्रीमेंट बनाए रखा गया था। यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। ₹18,000 बेसिक पे का मतलब कर्मचारी की कुल मासिक सैलरी ₹18,000 होना नहीं है। बेसिक के साथ लागू DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे भत्ते जुड़ सकते हैं। वहीं NPS, टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद हाथ में मिलने वाली रकम अलग होती है।

30 साल में ₹750 से ₹18,000 तक कितना बढ़ा वेतन

अगर सिर्फ न्यूनतम बेसिक पे को देखा जाए तो 1986 के ₹750 से 2016 के ₹18,000 तक यह रकम ₹17,250 बढ़ी। प्रतिशत के हिसाब से यह करीब 2,300 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि अंतिम बेसिक शुरुआती रकम का लगभग 24 गुना है। लेकिन इस आंकड़े को कर्मचारियों की वास्तविक कमाई में 24 गुना वृद्धि नहीं समझना चाहिए। तीन दशकों में महंगाई, DA, HRA और दूसरे भत्तों की व्यवस्था भी बदलती रही। वेतन आयोगों ने सिर्फ बेसिक पे नहीं बदली, बल्कि पूरे वेतन ढांचे को समय के अनुसार संशोधित किया। सातवें वेतन आयोग ने भी साफ तौर पर Pay Matrix के जरिए अलग-अलग स्तरों पर वेतन प्रगति की व्यवस्था की। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक न्यूनतम वेतन ₹18,000 और अधिकतम वेतन ₹2.25 लाख तय किया गया था।

अब आठवें वेतन आयोग से क्या उम्मीद है

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई व्यवस्था में न्यूनतम बेसिक पे कितनी होगी। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई हैं। प्रो. पुलक घोष पार्ट-टाइम सदस्य और पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। आयोग ने कर्मचारियों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और प्रतिनिधित्व भी मांगे हैं। अगस्त 2026 तक आयोग की गतिविधियों में विभिन्न राज्यों और संगठनों के साथ बैठकें तथा परामर्श जारी हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर चल रहे ₹30,000, ₹40,000 या ₹50,000 न्यूनतम बेसिक पे जैसे आंकड़ों को अभी आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता। इसी तरह 2.0, 2.57 या किसी दूसरे फिटमेंट फैक्टर को भी अंतिम समझना सही नहीं होगा। आठवें आयोग की सिफारिश आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही नई वेतन संरचना की तस्वीर साफ होगी।

आठवें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा नजर फिटमेंट फैक्टर पर

कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग में सबसे अहम मुद्दों में फिटमेंट फैक्टर शामिल है। सातवें आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि हर कर्मचारी की कुल सैलरी सीधे 2.57 गुना हो गई। सरकारी नियमों में इसका इस्तेमाल संशोधित Pay Matrix में वेतन तय करने के लिए किया गया था। आठवें वेतन आयोग में कितना फिटमेंट फैक्टर होगा और इससे न्यूनतम बेसिक पे कितनी बनेगी, इसका फैसला अभी बाकी है। आयोग की मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए कर्मचारियों को आधिकारिक सिफारिश और सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि ₹750 से ₹18,000 तक का सफर भारतीय केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की वेतन व्यवस्था में आए बड़े बदलाव को दिखाता है।

FAQ

4th Pay Commission में न्यूनतम बेसिक सैलरी कितनी थी?

चौथे वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन ₹750 था। वित्त आयोग की रिपोर्ट में भी 4th CPC का न्यूनतम वेतन ₹750 दर्ज किया गया है।

7th Pay Commission में न्यूनतम बेसिक पे कितनी हुई?

सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 प्रति माह की गई। साथ ही 2.57 का फिटमेंट फैक्टर और Pay Matrix व्यवस्था लागू हुई।

क्या 8th Pay Commission में नई बेसिक सैलरी तय हो गई है?

नहीं। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन नई न्यूनतम बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं। आयोग को रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

By Sonam Gupta

Sonam Gupta is a Content Writer at SuchnaTak.in. He writes about Teacher Recruitment, Government Jobs, Education News, Scholarships, Admit Cards, Results, and Admissions, providing accurate and reliable updates from official sources.

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